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                              || Chamunda Devi ||
                        || चामुण्डा देवी की चालीसा ||





हिन्दू मान्यतानुसार देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों में से चामुण्डा देवी प्रमुख हैं। दुर्गा सप्तशती में चामुण्डा देवी की कथा का वर्णन किया है। माना जाता है कि चामुण्डा देवी की साधना करने से मनुष्य को परम सुख की प्राप्ति होती है। आइए पढ़ें चामुंडा देवी की चालीसा:

चामुण्डा देवी की चालीसा (Chamunda Devi in Hindi)


                                   दोहा:-

                                         नीलवरण मा कालिका रहती सदा प्रचंड ।दोहा
                                       दस हाथो मई ससत्रा धार देती दुस्त को दांड्ड़ ।।दोहा

                                        मधु केटभ संहार कर करी धर्म की जीत ।दोहा
                                        मेरी भी बढ़ा हरो हो जो कर्म पुनीत ।।दोहा
                                चौपाई:-

नमस्कार चामुंडा माता ।maa तीनो लोक मई मई विख्याता ।।चौपाई
हिमाल्या मई पवितरा धाम है ।maa महाशक्ति तुमको प्रडम है ।।1।।चौपाई

मार्कंडिए ऋषि ने धीयया ।maa कैसे प्रगती भेद बताया ।।चौपाई
सूभ निसुभ दो डेतिए बलसाली ।maa तीनो लोक जो कर दिए खाली ।।2।।चौपाई

वायु अग्नि याँ कुबेर संग ।maa सूर्या चंद्रा वरुण हुए तंग ।।चौपाई
अपमानित चर्नो मई आए ।maa गिरिराज हिमआलये को लाए ।।3।।चौपाई

भद्रा-रॉंद्र्रा निट्टया धीयया ।maa चेतन शक्ति करके बुलाया ।।चौपाई
क्रोधित होकर काली आई ।maa जिसने अपनी लीला दिखाई ।।4।।चौपाई

चंदड़ मूंदड़ ओर सुंभ पतए ।maa कामुक वेरी लड़ने आए ।।चौपाई
पहले सुग्गृीव दूत को मारा ।maa भगा चंदड़ भी मारा मारा ।।5।।चौपाई

अरबो सैनिक लेकर आया ।maa द्रहूँ लॉकंगन क्रोध दिखाया ।।चौपाई
जैसे ही दुस्त ललकारा ।maa हा उ सबद्ड गुंजा के मारा ।।6।।चौपाई

सेना ने मचाई भगदड़ ।maa फादा सिंग ने आया जो बाद ।।चौपाई
हत्टिया करने चंदड़-मूंदड़ आए ।maa मदिरा पीकेर के घुर्रई ।।7।।चौपाई

चतुरंगी सेना संग लाए ।maa उचे उचे सीविएर गिराई ।।चौपाई
तुमने क्रोधित रूप निकाला ।maa प्रगती डाल गले मूंद माला ।।8।।चौपाई

चर्म की सॅडी चीते वाली ।maa हड्डी ढ़ाचा था बलसाली ।।चौपाई
विकराल मुखी आँखे दिखलाई ।maa जिसे देख सृिस्टी घबराई ।।9।।चौपाई

चंदड़ मूंदड़ ने चकरा चलाया ।maa ले तलवार हू साबद गूंजाया ।।चौपाई
पपियो का कर दिया निस्तरा ।maa चंदड़ मूंदड़ दोनो को मारा ।।10।।चौपाई

हाथ मई मस्तक ले मुस्काई ।maa पापी सेना फिर घबराई ।।चौपाई
सरस्वती मा तुम्हे पुकारा ।maa पड़ा चामुंडा नाम तिहरा ।।11।।चौपाई

चंदड़ मूंदड़ की मिरतट्यु सुनकर ।maa कालक मौर्या आए रात पर ।।चौपाई
अरब खराब युध के पाठ पर ।maa झोक दिए सब चामुंडा पर ।।12।।चौपाई

उगर्र चंडिका प्रगती आकर ।maa गीडदीयो की वाडी भरकर ।।चौपाई
काली ख़टवांग घुसो से मारा ।maa ब्रह्माड्ड ने फेकि जल धारा ।।13।।चौपाई

माहेश्वरी ने त्रिशूल चलाया ।maa मा वेश्दवी कक्करा घुमाया ।।चौपाई
कार्तिके के शक्ति आई ।maa नार्सिंघई दित्तियो पे छाई ।।14।।चौपाई

चुन चुन सिंग सभी को खाया ।maa हर दानव घायल घबराया ।।चौपाई
रक्टतबीज माया फेलाई ।maa शक्ति उसने नई दिखाई ।।15।।चौपाई

रक्त्त गिरा जब धरती उपर ।maa नया डेतिए प्रगता था वही पर ।।चौपाई
चाँदी मा अब शूल घुमाया ।maa मारा उसको लहू चूसाया ।।16।।चौपाई

सूभ निसुभ अब डोडे आए ।maa सततर सेना भरकर लाए ।।चौपाई
वाज्ररपात संग सूल चलाया ।maa सभी देवता कुछ घबराई ।।17।।चौपाई

ललकारा फिर घुसा मारा ।maa ले त्रिसूल किया निस्तरा ।।चौपाई
सूभ निसुभ धरती पर सोए ।maa डेतिए सभी देखकर रोए ।।18।।चौपाई

कहमुंडा मा ध्ृम बचाया ।maa अपना सूभ मंदिर बनवाया ।।चौपाई
सभी देवता आके मानते ।maa हनुमत भेराव चवर दुलते ।।19।।चौपाई

आसवीं चेट नवराततरे अओ ।maa धवजा नारियल भेट चाड़ौ ।।चौपाई
वांडर नदी सनन करऔ ।maa चामुंडा मा तुमको पियौ ।।20।।चौपाई

                               दोहा:-

सरणागत को शक्ति दो हे जाग की आधार ।दोहा
‘ओम’ ये नेया दोलती कर दो भाव से पार ।।दोहा

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