Kambeshwar Dham|| Kamdev dham


                                                                         यात्रा

                          कामेश्वर धाम 

         (यहा शिवजी  के तीसरे नेत्र से भस्म हुए कामदेव)





                                 कामेश्वर धाम



कामेश्वर धाम उत्तर प्रदेश  के बलिया  जिले के कारों ग्राम में स्थित है। इस धाम के बारे में मान्यता है कि यह शिव
पुराण और वलिमिकी रामायण में वर्णित वही जगह है जहा भगवान शिव ने देवताओं के सेनापति  को जला कर भस्म कर दिया था। यहाँ पर आज भी वह आधा जला हुआ, हरा भरा आम का वृक्ष (पेड़) है जिसके पीछे छिपकर कामदेव ने समाधि में लीन भगवान शंकर पर पुष्प बाण चलाया था।



                                    वाल्मीकि रामायण में वर्णन:-

                               श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण


                                                      ।। बालकाण्डे।।


                                                            (त्रयोविंश: सर्ग:)





















कामेश्वर धाम का महात्म्य:-



शिवपुराण के अनुसार महाबली तारकासुर ने तप करके ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया जिसके तहत उसकी मृत्यु केवल शिवपुत्र के हाथों हो सकती थी। यह लगभग अमरता का वरदान था क्योंकि उस समय भगवान शिव की भार्या सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपने पतिदेव भगवान भोलेनाथ के अपमान से रूष्ट होकर यज्ञ भूमि में आत्मदाह कर चुकी थीं। इस घटना से क्रोधित भगवान शिव तांडव नृत्य कर देवगणों के प्रयास से शान्त होकर परम शान्ति के निमित्त विमुकित भूमि गंगा तमसा के पवित्र संगम पर आकर समाधिस्थ हो चुके थे।पौराणिक ग्रंथों और वाल्मीकि रामायण के अनुसार त्रेतायुग में इस स्थान पर महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम और लक्ष्मण भी आये थे। यहां दुर्वासा ऋषि ने भी तप किया था। अघोर पंथ के प्रतिष्ठापक श्री किनाराम बाबा की प्रथम दीक्षा यहीं पर हुई थी



मंदिर निर्माण:-



अवध के राजा कवलेश्वर ने आठवीं सदी में यहां भगवान शिव के मंदिर का निर्माण करवाया था। जिसकी वजह से इस मंदिर को कवलेश्वर नाथ मंदिर भी कहा जाता है। संयुक्त प्रांत में इस्तमरारी बंदोबस्त के दौरान ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड कार्नवालिस  ने सरकारी गजट में इस मंदिर के समीप स्थित झील को कवलेश्वर ताल दर्ज किया है।

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