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Monday, January 4, 2021

राजद नेता शिवानंद गिर3तार, बेल मिली

 राजद नेता शिवानंद गिर3तार, बेल मिली

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता व पार्टी के राष्ट्रीय प्रव1ता शिवानंद तिवारी को शनिवार को पटना में गिर3तार कर लिया गया। तिवारी जिलाधिकारी के आदेश का उल्लंघन कर सीवान जाने की तैयारी कर रहे थे। गिर3तारी के बाद शिवानंद को न सिर्फ जमानत पर छोड़ दिया गया बल्कि सीवान में घुसने से उन पर लगे प्रतिबंध को भी जिलाधिकारी सीके अनिल ने हटा लिया। दूसरी ओर बिहार के मु2य सचिव केएएच सुब्रमण्यम ने अनिल के खिलाफ शिवानंद द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के आज आदेश दे दिए। ये आरोप सीवान का डीएम बनने से पूर्व अनिल की तैनातियों के बारे में हैं। इनमें बिल पेश करने में हेराफेरी, सरकार बंगले पर क4जा, जनता और वकीलों से दुव्र्यवहार केआरोप हैं।गौरतलब है कि तिवारी ने राजद सांसद शहाबुद्दीन पर प्रतिबंध के विरोध में एक कार्यक्रम में जिलाधिकारी को खूब खरीखोटी सुनाई थी और उन्हेें सबक सिखाने की धमकी भी दी थी। इसी के बाद अनिल ने ३ मार्च को शिवानंद पर दो माह केलिए प्रतिबंध लगा दिया था। शिवानंद ने घोषणा की थी कि वह डीएम का आदेश नहीं मानेंगे और सीवान जाएंगे।

गिर3तारी के बाद शिवानंद को सीवान के एक बाहरी इलाके में डीएम की अस्थायी अदालत के समक्ष पेश किया गया जहां अनिल ने उन्हें जमानत पर छोड़ दिया। डीएम ने उन पर लगा प्रतिबंध भी हटा लिया और कहा ‘वह अब आजाद पंछी हैं।’

लालू प्रसाद यादव के करीबी और बिहार के पूर्व मंत्री तिवारी को पार्टी सांसद शहाबुद्दीन पर रोक लगाने के विरोध में अनिल के खिलाफ पटना में भडक़ाउ भाषण देने के आरोप में गिर3तार किया गया। तिवारी ने मु2य सचिव केएएच सुब्रमण्यम तथा पुलिस महानिदेशक के सीवान न जाने के अनुरोध को ठुकरा दिया। दोनों अधिकारियों ने शुक्रवार की रात तिवारी से भेंटकर सीवान जाने का कार्यक्रम एक ह3ते टालने का अनुरोध किया था, जिससे कि वे डीएम के आदेश की समीक्षा कर सकें। इसी दौरान तिवारी ने डीएम के खिलाफ शिकायतेंं सौंपी।

सुरक्षा परिषद के विस्तार पर आशंका गलत

संयु1त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार आम सभा में मतदान द्वारा किए जाने से किसी खतरनाक विभाजन होने की आशंकाओं भारत ने खारिज कर दिया है। उसने कहा है कि ऐसे तर्क देने वाले लोग चाहते हैं कि इस ताकतवर संगठन का लोकतंत्रीकरण नहीं हो। संयु1त राष्ट्र में भारत के राजदूत निरुपम सेन ने कहा है कि सभी १९१ सदस्यों की आम सहमति से सुरक्षा परिषद के विस्तार के बारे में आशंकाएं निराधार हैं। उन्होंने कहा कि मतदान एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इस विश्व संगठन के चार्टर में इसका प्रावधान किया गया है। संयु1त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान के सुधार प्रस्तावों पर बहस में भाग लेते हुए शुक्रवार को उन्होंने इस सुझाव को मजबूती से खारिज किया कि आम सहमति बनाने की प्रक्रिया के लिए कोई समय सीमा तय नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सुझाव को मानने का मतलब होगा कि विकासशील देशों को प्रतिनिधित्व मिलने में अनिश्चित काल के लिए देरी करना।अमेरिका और चीन सहित कुछ देशों द्वारा सुरक्षा परिषद का विस्तार आम सभा में मतदान द्वारा कराए जाने पर खतरनाक विभाजन होने और परिषद की कार्यकुशलता पर असर पडऩे का तर्क दिए जाने को खारिज करते हुए सेन ने कहा कि इन देशों को पांच स्थाई सदस्यों का प्रभुत्व कम हो जाने का खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि ये देश विश्व संगठन के लोकतंत्रीकरण को रोकना चाहते हैं।

गौरतलब है कि भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील जैसे चार देशों के समूह (जी-४) सुरक्षा परिषद के विस्तार के लिए अगले कुछ महीनों में आम सभा में प्रस्ताव लाना चाहते हैं। वे परिषद में अपने लिए स्थाई सीट पाने को संयु1त राष्ट्र के चार्टर में संशोधन कराना चाहते हैं। अन्नान के प्रस्ताव दिया है कि सदस्य देश परिषद के विस्तार केमुद्दे पर संयु1त राष्ट्र के विश्व नेताओं के सितंबर मध्य में होने वाले स66ोलन के पहले किसी समझौते तक पहुंचें। अमेरिका और चीन सहित कुछ देश मतदान द्वारा सुरक्षा परिषद के विस्तार का विरोध कर रहे हैं।

संयु1त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार आम सभा में मतदान द्वारा किए जाने से किसी खतरनाक विभाजन होने की आशंकाओं भारत ने खारिज कर दिया है। उसने कहा है कि ऐसे तर्क देने वाले लोग चाहते हैं कि इस ताकतवर संगठन का लोकतंत्रीकरण नहीं हो। संयु1त राष्ट्र में भारत के राजदूत निरुपम सेन ने कहा है कि सभी १९१ सदस्यों की आम सहमति से सुरक्षा परिषद के विस्तार के बारे में आशंकाएं निराधार हैं। उन्होंने कहा कि मतदान एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इस विश्व संगठन के चार्टर में इसका प्रावधान किया गया है। संयु1त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान के सुधार प्रस्तावों पर बहस में भाग लेते हुए शुक्रवार को उन्होंने इस सुझाव को मजबूती से खारिज किया कि आम सहमति बनाने की प्रक्रिया के लिए कोई समय सीमा तय नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सुझाव को मानने का मतलब होगा कि विकासशील देशों को प्रतिनिधित्व मिलने में अनिश्चित काल के लिए देरी करना।अमेरिका और चीन सहित कुछ देशों द्वारा सुरक्षा परिषद का विस्तार आम सभा में मतदान द्वारा कराए जाने पर खतरनाक विभाजन होने और परिषद की कार्यकुशलता पर असर पडऩे का तर्क दिए जाने को खारिज करते हुए सेन ने कहा कि इन देशों को पांच स्थाई सदस्यों का प्रभुत्व कम हो जाने का खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि ये देश विश्व संगठन के लोकतंत्रीकरण को रोकना चाहते हैं।

गौरतलब है कि भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील जैसे चार देशों के समूह (जी-४) सुरक्षा परिषद के विस्तार के लिए अगले कुछ महीनों में आम सभा में प्रस्ताव लाना चाहते हैं। वे परिषद में अपने लिए स्थाई सीट पाने को संयु1त राष्ट्र के चार्टर में संशोधन कराना चाहते हैं। अन्नान के प्रस्ताव दिया है कि सदस्य देश परिषद के विस्तार केमुद्दे पर संयु1त राष्ट्र के विश्व नेताओं के सितंबर मध्य में होने वाले स66ोलन के पहले किसी समझौते तक पहुंचें। अमेरिका और चीन सहित कुछ देश मतदान द्वारा सुरक्षा परिषद के विस्तार का विरोध कर रहे हैं।


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