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Monday, January 4, 2021

अमेरिकी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

 अमेरिकी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

सेना की वापसी के लिए दबाव बढ़ाया

इराक के शिया मौलवी मु1तदा अल-सदर के समर्थकों ने शनिवार को अमेरिकी सेना की वापसी के लिए उसी चौक पर भारी विरोध प्रदर्शन किया, जहां दो वर्ष पहले इसी दिन प्रदर्शनकारियों ने सद्दाम हुसैन के विशाल बूत को गिरा दिया था। प्रदर्शनकारी अमेरिका विरोधी नारे लगा रहे थे। प्रदर्शन के दौरान अमेरिकी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शित किया गया। वहीं अमेरिकी अधिकाररियों का कहना है कि सेना की वापसी के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है, लेकिन साथ ही उन्होंने इराकी सेना के देश की सुरक्षा के लिए सक्षम होने तक इराक में रहने का वादा किया।पिछले वर्ष अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं के साथ एक युद्धविराम समझौता करने वाले शिया मौलवी मु1तदा अल-सदर के समर्थकों ने शनिवार को फिरदौस चौराहे को पूरा घेर लिया और इराकी झंडे लहराते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी 4लेयर और सद्दाम के पुतले फूंके। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी बगदाद में शुक्रवार को हमले में मारे गए अल-सदर के एक वरिष्ठ नेता का ताबूत भी साथ लिए नजर आए। प्रदर्शन के दौरान अमेरिकी और इराकी सेनाओं की जुलूस पर कड़ी नजर थी। वहीं सेंट्रल बगदाद की सडक़ें यातायात क लिए पूरी तरह से बंद थी और भारी सं2या में लोग वहां एकत्र थे। इसके साथ ही सुन्नी मुसलिम मौलवियों ने अपने अनुयायियों का इराक के पतन के दो वर्ष पूरे होने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। हालांकि उनके अधिकारी ने कहा कि उनके अनुयायी फिरदौस चौक पर रैली में शामिल नहीं होंगे। वहीं देश के दूसरे हिस्सों में भी अमेरिकी सेना की वापसी के लिए विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।

जिंदल अमेरिकी समिति के उपाध्यक्ष नियु1त

भारतीय मूल के रिप4िलकन सांसद बॉबी जिंदल को आणविक और जैविक हमलों से बचाव के लिए गठित गृह सुरक्षा उपसमिति का उपाध्यक्ष नियु1त किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष क्रिस्टोफर कॉ1स ने जिंदल की नियु1ित की घोषणा करते हुए कहा कि जिंदल का नेतृत्व आतंकियों के गैर पारंपरिक हथियारों के हमलों से देश को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होगा।इस मौके पर जिंदल ने कहा कि उन्हें जो दायित्व सौंपा गया है उसका अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्व है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को आतंकवादियों से सुरक्षित रखने और उन्हें परास्त करना संघीय सरकार की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। गौरतलब है कि अमेरिका को आणविक और जैविक हमलों से महफूज रखने के लिए इस समिति का गठन किया गया है। जिंदल ने समिति के दो निदेशकों के पद के लिए भारतीय मूल के दो व्य1ितयों सपना खटिवाला और नियाल पटेल की नियु1ित की है। ये दोनों ही जिंदल के गृह राज्य लुइसियाना के हैं और उनके घनिष्ठ सहयोगी हैं।

पृथ्वी पर था हाइड्रो जन का आवरण

अमेरिकी विज्ञानियों ने पहले की धारणा का खंडन करते हुए कहा है कि प्रारंभ में पृथ्वी के वातावरण में हाइड्रोजन गैस की प्रमुखता थी। पहले यह बताया जाता था कि प्रारंभ में पृथ्वी के वातावरण में कार्बन डाईऑ1साइड गैस बड़ी मात्रा में मौजूद थी।यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के शोधकर्8ााओं ने बताया कि प्रारंभ में वातावरण ४० प्रतिशत हाइड्रोजन से भरा हुआ था, जिसके चलते एमीनो एसिड्स आदि कार्बनिक पदार्थों के उत्पादन में मदद मिली। वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी का निर्माण ४.६ अरब वर्ष पहले हुआ था और इसके करीब १ अरब वर्ष बाद जीवन का प्रादुर्भाव हुआ। इस विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता ओवेन टून ने कहा कि पहले यह माना जाता था कि पृथ्वी के प्रारंभिक वातावरण में कम हाइड्रोजन तथा अधिक कार्बन डाईऑ1साइड की मात्रा विद्यमान थी, लेकिन अब यह धारणा गलत साबित हुई है। वैज्ञानिकों ने उल्काङ्क्षपडों और समुद्री झरनों का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है। प्रारंभ में पृथ्वी पर सक्रिय ज्वालामुखी से भी भारी मात्रा में हाइड्रोजन गैस निकली। यही हाइड्रोजन गैस धीरे-धीरे पृथ्वी की सतह से गायब हो गई।

प्रारंभिक आकलनों में यह बताया गया था कि प्रारंभ में पृथ्वी की सतह का तापमान कम से कम ८०० डिग्री सेल्सियस था, लेकिन कोलोराडो के विज्ञानियों का कहना है कि पृथ्वी का तापमान कभी भी ४०० डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं था। पृथ्वी के वातावरण में तीव्र गति से बहने वाली ध्रुवीय हवाओं के कारण हाइड्रोजन गैस पृथ्वी की सतह से निकल गई। इन विज्ञानियों ने १९५३ में यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो द्वारा किए गए एक शोध का भी हवाला दिया। शिकागो विश्वविद्यालय के एक वैज्ञानिक स्टेनली मिलर ने मिथेन, अमोनिया, हाइड्रोजन और जल से भरे एक चै6बर में विद्युत शक्ति के प्रवाह से अमीनो एसिड के उत्पादन में सफलता पाई थी।

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