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Tuesday, January 5, 2021

बहुत नाजुक होते हैं छोटे बच्चे

 बहुत नाजुक होते हैं छोटे बच्चे

नवजात शिशु को पालना आसान नहीं है। वह न तो अपनी तकलीफ बता सकता है, न ही जरूरत। उसकी जरूरतों को माता-पिता को उसके क्रियाकलापों से समझना पड़ता है।

मां बनना एक सुखद अनुभूति है। मां बनने से पहले हर गर्भवती स्त्री बच्चे को ले कर न जाने कितने 2वाब बुनती है। लाड़-प्यार के अलावा नवजात शिशु को जरूरत होती है, सही देखभाल की। वह बहुत ही नाजुक होता है। सबसे पहले तो बच्चे के टीकाकरण पर ध्यान देना चाहिए। जन्म के बाद ही बच्चे को बीसीजी, हेपेटाइटिस के टीके लगने और पोलियो की दवा पिलाई जानी जरूरी है। उसका छठवें, १०वें और १४वें ह3ते में डीटीपी, पोलियो ड्रॉप और हेपेटाइटिस-बी का वै1सीनेशन हो जाना चाहिए।

ह्वशिशु के रोने का मतलब यह नहीं है कि उसे कोई तकलीफ ही है। यह उसका अपनी बात कहने का तरीका 5ाी हो सकता है। शिशु कई वजह से रोता है। ह्वअकसर महिलाओं की शिकायत होती है कि शिशु सोता बड़ी मुश्किल से है। दरअसल, हर शिशु के सोने की समय सीमा और नींद की जरूरत अलग-अलग होती है। कुछ शिशु २० घंटे सोते हैं, तो कुछ ० घंटे। कई बार सुलाने का तरीका गलत होने पर 5ाी वह नहीं सो पाता है। ह्वभूख लगने पर शिशु का रोना एक आम बात है। वह दर्द की वजह से 5ाी रोता है। हो सकता है नैपी की पिन चुभ रही हो या जहां लिटाया हो, वहां पड़ा अनाज का दाना या बटन उसे चुभ रहा हो। हो सकता है, उसने सूसू कर दी हो और वह गीला हो। कई बार शिशु खुद को अकेला महसूस करने के कारण भी रोते हैं। कुछ देर शिशु के पास लेट जाइए, उसे थपकी दे कर तसल्ली दीजिए।

पांच साल की उम्र तक सभी जरूरी टीके लगवा लेने चाहिए।

गरमी में नवजात शिशु को दिन में एक बार जरूर नहलाएं। पानी बहुत ठंडा न हो। अगर किसी कारणवश शिशु को रोज न नहलाएं, तो उसे पलंग पर लिटा कर रुई पानी में भिगो कर स्पंजिंग कर दें। उसकी आंखें, कान, नाक, हाथ और पैरों को अच्छे से स्पंज करें। अकसर ये अंग स्पंज करते समय छूट जाते हैं, खास कर हाथों और पैरों की उंगलियों के बीच केहिस्से। नैपी एरिया सबसे आखिर में साफ करें। पहले करने पर वहां की गंदगी सारे शरीर पर फैल जाएगी।

शिशु को नहलाने से पहले बेबी सोप, पानी, टब, रुई, मुलायम तौलिया, शिशु के कपड़े, नैपी सब पास में रख लें। पानी गुनगुना होना चाहिए। उसके कपड़े उतारें और तौलिए में लपेट कर रुई से पहले उसक ी आंखे, कान, चेहरा, गरदन साफ करें।

बच्चे की हलकी मालिश करके १५ मिनट या आधे घंटे बाद उसे गुनगुने पानी से नहलाएं। टब में तौलिया डाल कर बच्चे को अपने हाथ का सहारा दे कर रखें। उसके कंधे पकड़ कर संभालें। तौलिया डालने से बच्चा फिसलेगा नहीं। बच्चे का सिर बाएं हाथ की हथेली में थाम कर संभाले रखें और आराम से दाएंं हाथ से हलका साबुन लगाएं। पानी धीरे-धीरे डालें और चेहरे पर न डालें। सिर में लगे साबुन के झाग को पहले साफ कपड़े से पोंछ लें, फिर पानी डालें, साबुन के आंखों में जाने का 2ातरा नहीं रहेगा। साबुन लगाने के बाद बच्चा फिसल सकता है, इसलिए उसे मजबूती से थामे रखें। उसके पूरे बदन पर धीरे-धीरे पानी डालें। साबुन धुलने के बाद बच्चे को धीरे से टब के बाहर निकाल लें।

उसे तौलिया में लपेट कर पोंछें। मौसम के अनुसार शरीर पर पाउडर या बेबी लोशन लगाएं। धुली हुई नैपी पहनाएं।

शिशु स्वस्थ है या नहीं?

यदि शिशु दूध पी रहा है, चुस्त है, तो इसका मतलब है कि वह स्वस्थ है। अगर शिशु दिन में तीन बार मल त्याग करता है और फुरतीला बना हुआ है, तो परेशान न हों।

लेकिन मल के साथ खून आने, निढाल हो जाने और रिरियाने का मतलब है, वह स्वस्थ नहीं है। अकसर बच्चे के पेट में गैस होने से पेटदर्द की शिकायत हो जाती है। उसके मुंह में खाली बोतल न लगी रहने दें, खाली बोतल चूसने से उसके पेट में हवा भर जाती है और गैस की शिकायत हो जाती है।

शिशु को दूध पिलाते समय विशेष सावधानी बरतें। पूरा ध्यान बच्चे की ओर लगाएं। स्तन के दबाव से बच्चे की नाक बंद हो जाती है और वह छटपटाने लगता है। बच्चे को लेट कर दूध पिलाते हुए मां का सो जाना खतरनाक साबित हो सकता है।

नवजात शिशु की गरदन और सिर नहीं संभलता है, उसे सिर के नीचे हाथ का सहारा दे कर उठाएं। स्तन पर कोई दवा न लगाएं और दूध पिलाने से पहले निपल साफ कर लें। शिशु के मुंह में कभी उंगली न डालें, गंदी उंगली से इन्फे1शन हो सकता है।

ह्वसुलाने से पहले शिशु को दूध पिलाएं, उसका पेट भरा होना चाहिए। धीरे-धीरे गुनगुनाते, बाहों में झुलाते हुए सुलाएं। उसके बाद धीरे से बिस्तर पर लिटाएं। सोने से पहले मालिश करने से भी शिशु को गहरी नींद आ जाती है। मालिश करने पर वह समझ जाता है कि सोने का समय हो गया। सुलाने का कमरा रोशनीवाला न हो, परदे गिरा कर सुलाएं।


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