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Tuesday, January 5, 2021

कमरे की खूबसूरती बढ़ाती है टेबल

 कमरे की खूबसूरती बढ़ाती है टेबल

कमरे की खूबसूरती बढ़ाने में टेबलों की अहम भूमिका होती है। चाहे वह सेंटर टेबल हो, डाइनिंग टेबल हो या कॉर्नर टेबल।

सेंटर टेबल: सेंटर टेबल भी बाजार में कई तरह की आ गई है। जिस तरह की आप टेबल चाहते है, वह आपको आसानी से बाजार में मिल जाएगी। आजकल ग्लास सेंटर टेबल ज्यादा चलन में है, जो देखने में काफी सुंदर लगती हैं।

इसकी सही देखभाल की जाए तो ये लंबे समय तक चलती हैं। इनको आप गीले कपड़े से या फिर कोलीन से साफ कर सकतीं हैं। रोज साफ करने से इसकी चमक बरकरार रहेगी।

डाइनिंग टेबल : डायनिंग रूम ऐसा कमरा हैं, जिसका उपयोग सबसे ज्यादा होता हैं। सुव्यवस्थित डायनिंग रूम में आपके हाथों से बनाए खाने का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। अगर आप टेबल मैट बिछा कर सामान लगाएं, तो मेज की सजावट में रौनक आ जाती हैं। डायनिंग टेबल हर कीमत में उपल4ध है। बार कैबिनेट, कॉकरी कैबिनेट और बुफे टेबल। यह क6पलीट डायनिंग सेट काफी महंगा होता है। लेकिन इस पैकेज में वह सब कुछ है, जो आपके घर को एक बेहतरीन लुक दे सकता है। इसका हर सेट ऐसा है, जो आपके डायनिंग रूम को पूर्णता देगा।

कॉर्नर टेबल: कॉर्नर टेबल भले किनारे या कोनों में रखी रहती हैं, पर इससे उसकी उपयोगिता कम नहीं हो जाती है। इन पर सजे लैंप शेड, गुलदस्ते, शो पीस कमरे को अनोखी सुंदरता और आभा प्रदान करते हैं। इनकी उपयोगिता बस सजावटी सामान सजाने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि जब मेहमान ज्यादा हों, तब चाय का कप या कोल्ड ड्रिंक रखने के लिए कॉर्नर टेबल का ही इस्तेमाल होता है। ऐसी स्थिति में कार्नर टेबल पर भी टेबल मैट्स जरूर रखें ताकि उस पर निशान न पड़ें। कॉर्नर टेबल की नियमित सफाई करनी जरूरी है, 1योंकि इसी से सजते हैं घर के कोने।

पीठ दर्द पीछा 1यों नहीं छोड़ता

हमारी रीढ़ की हड्डी कई छोटी-छोटी कशेरुकाओं से मिल कर बनी होती है। जिसके फ्रेम में हमारे शरीर के अन्य 5ााग सुरक्षित रहते हैं। रीढ़ की कशेरुकाओं के बीच सूराख होते हैं, जिनसे हमारी दिमाग की नसें निकलती हैं। जो सारे शरीर की संवेदनाएं दिमाग तक पहुंचाने का काम करती हैं।

पीठ दर्द रीढ़ की हड्डी कमजोर होने या मांसपेशियों में खिंचाव के कारण होता है। रीढ़ के अंदर की नसें जो मस्तिष्क से जुड़ती हैं, उसमें किसी किस्म की दुश्वारी आने पर पीठ दर्द की शिकायत हो जाती है। शरीर के अन्य अंगों में कोई बीमारी पनपने पर भी पिछले हिस्से में दर्द होता है। पीठ दर्द कई प्रकार के होते हैं।

पीठ का सामान्य दर्द

रीढ़ की हड्डी के ऊपर मांस-पेशियां होती हैं।

शरीर को तनाव में न रखें। ज्यादा बोझ न उठाएं। क4ज से बचें। शुरू से व्यायाम की आदत डालें। सीढिय़ां चढऩा और तेज चाल में टहलना अच्छा व्यायाम है। सिर्फ काम ही नहीं, आराम भी करें। सही तरीके से बैंठेें। संतुलित आहार लें।

जिनका काम हमारे शरीर को मोडऩा और चलाना होता है। उन्हें ज्यादा तनाव में रखने पर पीठ दर्द होता है। जरूरत से ज्यादा काम करने पर मांसपेशियां थक जाती हैं और पीठ दर्द शुरू हो जाता है। भारी बालटी उठाने पर भी यह दर्द शुरू हो जाता है। कई बार काम के स्वभाव के कारण भी दर्द रहता है। मसलन बागवानी, ज्यादा देर तक बैठ कर तलने-बेलने का काम करने से भी पीठ दर्द की शिकायत हो जाती है। इन्फे1शन के कारण 5ाी पीठ दर्द होता है। कई बार खून के जरिए बै1टीरिया रीढ़ की हड्डी के अंदर पहुंच जाते हैं। जिससे उस स्थान पर सूजन हो जाती है और खिंचाव के कारण पीठ दर्द हो जाता है।

इसके लिए उपचार की जरूरत पड़ती है।

चोट लगना या हड्डी टूटना

कई बार गिरने या किसी चीज से टकरा जाने पर भी पीठ दर्द हो जाता है। हड्डी टूटने पर भी पीठ दर्द की शिकायत हो जाती है। इसके लिए ए1स-रे वगैरह के बाद इलाज होता है।

बीमारियों के कारण पीठ दर्द

* ४० साल की उम्र से पहले हड्डी की लोकल समस्या हो जाती है। इसे एंकर लूजिंग स्पोंडिलाइटिस कहते हैं। इसमें मरीज को काम करते हुए दर्द नहीं होता, लेकिन आराम करने पर समस्या बढ़ जाती है। ऑस्टियोपोरोसिस होने पर भी पीठ दर्द की शिकायत हो जाती है। रजोनिवृ8िा के दौरान कैल्शियम की कमी के कारण ऑस्टियोपोरोसिस हो जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस के दौरान हड्डियों में खोखलापन आने की वजह से जब महिलाएं वजन उठाने का काम करती हैं, तो जोर पडऩे के कारण पीठ दर्द व कमर दर्द शुरू हो जाता है। कई बार गुरदे में पथरी होने पर भी मिड बैक या लो बैक पेन शुरू हो जाता है, जिसमें मरीज दर्द से तड़पता है। कई बार कहीं का भी कैंसर होने पर वह रक्त के जरिए रीढ़ तक पहुंच जाता है, उससे पीठ दर्द की शिकायत हो जाती है।

* जिनकी उम्र ५० से ज्यादा है और वजन लगातार कम हो रहा है। साथ ही उनकी सिगरेट की लत है और परिवार में कैंसर की हिस्ट्री है, उन्हें पीठ-दर्द होने पर सावधान हो जाना चाहिए।

* तुरंत चेकअप कराएं, कैंसर हो सकता है। कैंसर वाला दर्द रात में होता है। दर्द की तीव्रता के कारण मरीज सो नहीं पाता है।

* पेप्टिक अल्सर के पीछे हड्डी तक चले जाने पर भी पीठ दर्द की शिकायत हो जाती है। रीढ़ की हड्डी खिसकने पर भी पीठ दर्द हो जाता है। जिन्हें क4ज रहती है, उन्हें भी पीठदर्द की शिकायत रहती है। शिएटिक नव्र्स में इरीटेशन होने पर भी पिछले हिस्से में दर्द की शिकायत हो जाती है।

गलत तरीके से बैठना

* गलत पॉस्चर में बैठने से 5ाी पीठ दर्द हो जाता है। गलत पॉस्चर में बैठने से मांसपेशियों में तनाव पैदा हो जाता है।

* हमेशा कूल्हे बाहर, पेट अंदर, छाती बाहर और कंधे सीधे होने चाहिए। इससे रीढ़ की हड्डी आराम की स्थिति में रहती है। उस पर बोझ नहीं पड़ता। आप मांसपेशियों को आराम देंगी, तो आपको आराम मिलेगा। उन्हें निरंतर तनाव में रखने पर कष्ट आपको ही होगा।

पीठ दर्द के आम कारण

कई बार डिलीवरी के दौरान नियंत्रित डिलीवरी न करवाने, फोरसेप लगने या बच्चे के ज्यादा देर तक फंसे रहने के कारण बच्चेदानी बाहर आ जाती है। बच्चेदानी आने पर नसें खिंचती हैं और पिछले हिस्से में दर्द शुरू हो जाता है। बच्चेदानी में सूजन आने पर भी पिछले हिस्से में दर्द रहता है।

पीठदर्द से मुक्ति के लिए

* सबसे पहले जानना जरूरी है कि पीठ दर्द के पीछे कारण 1या है? पूरी जांच करवाना जरूरी है। आम पीठ दर्द आराम करने और दर्द निवारक मलहम लगाने से ठीक हो जाता है। यदि ज्यादा काम करने से पीठ या कमर दर्द हो रहा है, तो आराम करने से ठीक हो जाएगा।

* शरीर को तनाव में न रखें। ज्यादा बोझ न उठाएं। क4ज से बचें। शुरू से व्यायाम की आदत डालें। सीढिय़ां चढऩा और तेज चाल में टहलना अच्छा व्यायाम है। सिर्फ काम ही नहीं, आराम भी करें। सही तरीके से बैंठेें। संतुलित आहार लें। भोजन में कैल्शियम वाली स4िजयां शामिल करें। हरी स4िजयां और विटामिन डी लें।


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