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Tuesday, January 5, 2021

विभाग और उनके काम

 विभाग और उनके काम

कंप्यूटरीकृ त सिस्टम : इस विभाग में आमतौर पर दो काम किए जाते हैं-कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण और फ्रेट ट्रैफिक इन्फरमेशन मैनेजमेंट।

राजपत्रित नियुक्तियां : रेलवे ट्रैफिक, एकाउंट्स, पर्सोनल व विजिलेंस आदि सेवाओं के लिए ग्रुप ए अधिकारी यूपीएससी की ओर से आयोजित की जाने वाली सिविल व एलाइड सर्विस परीक्षा के माध्यम से चयनित होते हैं। ये पहले डिविजनल और फिर जोनल लेवल पर काम करते हैं। अपनी रुचि, योग्यता और अनुभव के आधार पर उन्हें प्रोड1शन यूनिट या रेल इंडिया टे1िनकल और इकोनॉमिक सर्विस के लिए सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया जाता है।

इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (आईआरटीएस) : इस सेवा के अधिकारियों की दो जि6मेदारियां होती हैं। कॉमर्शियल डिवीजन में जहां फ्रेट बुक करने, ट्रांसपोर्टेशन और यात्री सेवाओं का काम होता है वहीं ऑपरेशन डिवीजन में, ट्रेन केचलने से जुड़े सारे प्रबंध देखने होते हैं। जांच, निरीक्षण और स्टेशन पर विभिन्न कार्यालयों का नियंत्रण इसी विभाग की ओर से होता है।

इस सेवा में जॉइन करने के बाद तीन साल की प्रोबेशनरी ट्रेनिंग होती है। ट्रेनिंग अवधि के अंतिम साल में नियमित रूप से पोस्टिंग होती है। ट्रेनिंग पूरी करने और विभागीय परीक्षा देने के बाद उन्हें असिस्टेंट कमर्शियल सुपरिंटेंडेंट या असिस्टेंट ऑपरेशन सुपरिटेंडेंट के तौर पर डिविजनल मु2यालय मेंं स्थायी पद दिया जाता है। चार साल के अनुभव के बाद वे डिविजनल कमर्शियल मैनेजर या डिविजनल ऑपरेशन मैनेजर और फिर बाद में सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर या सीनियर डिविजनल ऑपरेशन मैनेजर के पद पर प्रमोट होते जाते हैं। यहां से जोनल लेवल पर प्रोमोट होने के बाद उन्हें डेपुटी चीफ मैनेजर (कमर्शियल-ऑपरेशंस) और चीफ मैनेजर (कमर्शियल-ऑपरेशंस) बनाया जाता है। 

इंडियन रेलवे एकाउंट्स सर्विस (आईआरएएस)-रेलवे से संबंधित एकाउंट्स का प्रबंध और हिसाब रखना इसी सेवा के अधिकारी का काम है।

इस सेवा में चयनित होने के बाद दो साल का समय प्रोबेशन का होता है। इस दौरान उ6मीदवारों को रेलवे स्टाफ कॉलेज, वड़ोदरा और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। उन्हें ट्रेनिंग के बाद एक विभागीय परीक्षा पास करनी होती है जिसकेआधार पर वे असिस्टेंट एकाउंट्स ऑफिसर्स के पद पर नियुक्त होते हैं। बाद में उनका प्रमोशन डिविजनल एकाउंट्स ऑफिसर और सीनियर डिविजनल एकाउंट्स ऑफिसर के पद पर होता है। जोनल लेवल में प्रमोट होने पर पहला पद चीफ एकाउंट्स ऑफिसर या फाइनेंशियल एडवाइजर का होता है और जैसे-जैसे सीनियर होते जाते हैं, वैसे ही प्रमोशन भी होता जाता है। सबसे ज्यादा सीनियर अधिकारी अंतत: रेलवे बोर्ड में सदस्य (वि8ा) बनाए जाते हैं।

इंडियन रेलवे पर्सोनल सर्विस : रेलवे के सभी तरह के स्टाफ की बहाली, प्रोमोशंस, पोस्टिंग, ट्रेनिंग, स्टाफ कल्याण और अनुशासन आदि से जुड़ी सारी जि6मेदारियां इसी सेवा के अधिकारियों की होती है।

इस विभाग का अधिकारी तीन साल तक प्रोबेशन में काम करता है। उसके बाद दूसरे विभागों की तरह ही उसकी भी पदोन्नति होती है।

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) : आरपीएफ रेलवे की सुरक्षा के लिए लगाया जाने वाला पुलिस बल है। रेलवे संप8िायों और बुक किए गए सामानों की सुरक्षा के अलावा यात्रियों की कानून और व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं से निपटना इसी बल की ड्यूटी है। यह राज्य पुलिस से तालमेल बनाकर काम करता है। इस बल में भी तीन साल का प्रोबेशन होता है। इस अवधि में रंगरूटों को बड़ौदा, लखनऊ और दूसरे पुलिस ट्रेनिंग संस्थानों में प्रशिक्षित किया जाता है। इसके बाद उनकी नियुक्ति डिविजनल लेवल पर असिस्टेंट सि1योरिटी ऑफिसर के पद पर होती है। यहां पांच साल काम करने के बाद उन्हें डिविजनल सि1योरिटी ऑफिसर और फिर सीनियर डिविजनल सि1योरिटी ऑफिसर बनाया जाता है। जोनल लेवल पर वह डीआईजी और आईजी के पदों पर प्रमोट हो सकते हैं। आरपीएफ में सबसे बड़ा पद डायरे1टर जनरल का होता है, जो रेलवे बोर्ड का सदस्य होता है।

रेलवे इंजीनियरिंग सर्विस : यह सेवा पूरी तरह तकनीकी है। रेलवे के लिए पटरियों, पुलों और भवनों का निर्माण करना इसी सेवा से जुड़े अधिकारियों का काम है। इसमें इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ इले1िट्रकल इंजीनियर और इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मैकेनिकल इंजीनियर, दो विभाग होते हैं।

मैकेनिकल इंजीनियर के लिए स्पेशल 1लास रेलवे अपरेंटिसशिप परीक्षा देनी होती है। चयनित उ6मीदवारों को चार साल की ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है।

व्यक्तिगत गुण

उ8ार रेलवे के वरिष्ठïï प्रबंधक रवि शर्मा के अनुसार रेलवे आम लोगों की सेवा पर आधारित एक विशाल से1टर है। इस पर लाखों लोगों और करोड़ों रुपए के सामानों की जि6मेदारी होती है। इसलिए इस विभाग में काम करने वाले लोगों के लिए कर्तव्य, अनुशासन और काम के प्रति समर्पण का होना बेहद जरूरी है।

अवसर कैसे पाएं

अलग-अलग कामों पर आधारित इस से1टर में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं। इस से1टर में नियुक्ति यूपीएससी की ओर से आयोजित होने वाली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा व एलायड परीक्षा के माध्यम से ही नियुक्ति संभव है। इसमें केवल ग्रेजुएट ही शामिल हो सकते हैं। इंजीनियरिंग ग्रेजुएट या इसके समान योग्यता वाले युवा रेलवे इंजीनियरिंग सर्विस के लिए आवेदन कर सकते हैं। तीसरे और चौथे श्रेणी के पदों के लिए रिक्तियों के आधार पर नियुक्तियां होती हैं।

वेतनमान

इस से1टर में अधिकारियों व कर्मचारियों का वेतन इन्हीं सेवाओं के दूसरे अधिकारियों की तरह ही होता है। वेतन के साथ कई तरह के भ8ो और आवास की सुविधा भी उन्हें दी जाती है।

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